IMD Rain Alert – फरवरी का महीना अब अपने दूसरे हिस्से में पहुंच चुका है और देशभर में मौसम का मिजाज धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है। कड़ाके की सर्दी अब विदाई की ओर है और दिन के तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दोपहर की धूप अब चुभने लगी है और लोगों ने भारी ऊनी कपड़े समेटने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। ताजा मौसम बुलेटिन के अनुसार, उत्तर भारत की तरफ दो नए पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस तेजी से बढ़ रहे हैं। पहला सिस्टम 13 फरवरी के आसपास सक्रिय होगा और दूसरा 16 फरवरी को असर दिखा सकता है। इन दोनों मौसमी सिस्टमों के चलते आने वाले पांच दिनों में मौसम फिर करवट ले सकता है।
पहाड़ों पर फिर बर्फबारी और बारिश की संभावना
मौसम विभाग के मुताबिक इन पश्चिमी विक्षोभों का सबसे ज्यादा असर पहाड़ी राज्यों में देखने को मिलेगा। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में एक बार फिर बर्फबारी का दौर शुरू हो सकता है। निचले इलाकों में बारिश होने के भी आसार हैं। अगर ऐसा होता है तो पहाड़ों पर ठंड दोबारा बढ़ सकती है। पिछले कुछ दिनों से जहां धूप निकलने लगी थी और तापमान थोड़ा सामान्य हुआ था, वहीं अब बर्फबारी से ठंड फिर लौट सकती है। इसका असर मैदानी इलाकों तक भी महसूस किया जा सकता है, खासकर सुबह और रात के समय।
मैदानी इलाकों में तापमान बढ़ा
मैदानी क्षेत्रों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में न्यूनतम तापमान अब 8 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने लगा है। अमृतसर जैसे शहरों में भी सर्दी में स्पष्ट कमी देखी जा रही है। दिन में तेज धूप निकल रही है और आसमान फिलहाल साफ है। उत्तर दिशा से चलने वाली शुष्क हवाओं की वजह से नमी कम है, जिससे मौसम खुला और सुहावना लग रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ये ठंडी हवाएं न चल रही होतीं तो दोपहर की धूप में खड़ा होना मुश्किल हो जाता। हालांकि यह राहत ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है। जैसे ही पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होंगे, बादल बढ़ेंगे और कई जगह हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
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20 फरवरी के आसपास व्यापक बदलाव के संकेत
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि 20 फरवरी के आसपास देश के कई हिस्सों में एक साथ मौसम बदल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी आपस में मिलकर एक बड़ा सिस्टम बना सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो उत्तर भारत के साथ-साथ मध्य भारत और कुछ दक्षिणी राज्यों में भी बारिश दर्ज की जा सकती है। यह बारिश तापमान में हो रही बढ़ोतरी पर अस्थायी ब्रेक लगा सकती है। यानी जो गर्मी धीरे-धीरे दस्तक दे रही है, वह कुछ दिनों के लिए थम सकती है।
दक्षिण भारत में भी मौसम का बदला रुख
दक्षिण भारत में भी मौसम हलचल भरा हो गया है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं का रुख अब प्रायद्वीपीय भारत की ओर मुड़ गया है। तमिलनाडु के तटीय इलाकों और आंध्र प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में बादलों की आवाजाही बढ़ गई है। अगले 24 घंटों में तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में हल्की बारिश हो सकती है। केरल और कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों में भी बादल छाए रह सकते हैं। हालांकि भारी बारिश की संभावना फिलहाल कम बताई जा रही है, लेकिन मौसम में नमी बढ़ने से तापमान में हल्की गिरावट संभव है।
बाकी राज्यों में शुष्क मौसम, पर बढ़ता पारा
देश के कई हिस्सों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश में फिलहाल मौसम शुष्क बना हुआ है। यहां आसमान साफ है और दिन का तापमान धीरे-धीरे ऊपर जा रहा है। सुबह हल्की ठंड जरूर महसूस हो रही है, लेकिन दोपहर में गर्मी का एहसास बढ़ रहा है। अगर बारिश नहीं होती तो आने वाले दिनों में यहां गर्मी और तेज हो सकती है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ के असर से इन इलाकों में भी आंशिक बादल और हल्की बूंदाबांदी से इनकार नहीं किया जा सकता।
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किसानों और आम लोगों के लिए क्या मायने
मौसम में यह उतार-चढ़ाव किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी से जहां जल स्रोतों को फायदा मिलेगा, वहीं मैदानी इलाकों में हल्की बारिश रबी फसलों के लिए लाभकारी हो सकती है। हालांकि ज्यादा बारिश या ओलावृष्टि फसलों को नुकसान भी पहुंचा सकती है, इसलिए किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि कोहरा और प्रदूषण का स्तर फिलहाल कम है, जिससे वातावरण साफ है और दृश्यता बेहतर है।
आगे कैसी रहेगी स्थिति
कुल मिलाकर कहा जाए तो फरवरी के बचे हुए दिनों में मौसम पूरी तरह स्थिर रहने वाला नहीं है। तापमान बढ़ने का सिलसिला जारी है, लेकिन बीच-बीच में पश्चिमी विक्षोभ और नमी वाले सिस्टम इसे संतुलित करते रहेंगे। पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश से ठंड की हल्की वापसी हो सकती है। हालांकि यह वापसी अस्थायी होगी और मार्च की शुरुआत तक गर्मी का असर साफ दिखाई देने लगेगा।
Disclaimer: यह लेख मौसम विभाग की उपलब्ध जानकारियों और सामान्य पूर्वानुमानों के आधार पर तैयार किया गया है। मौसम की स्थिति समय और स्थान के अनुसार बदल सकती है। सटीक और ताजा जानकारी के लिए कृपया संबंधित आधिकारिक मौसम विभाग या स्थानीय प्रशासन की सलाह अवश्य देखें।









