नए GST के बाद खाने के तेल के दाम गिरे, जानिए आज का ताज़ा भाव Edible Oil Price

By admin

Published On:

Cooking Oil Rate Fall
+500
अभी Join करें WhatsApp Group फ़्री ग्रुप में ज्वाइन करें!!
Join Now →

Edible Oil Price – रसोई में इस्तेमाल होने वाला खाने का तेल हर घर की ज़रूरत है। चाहे सब्ज़ी बनानी हो, पूड़ी तलनी हो या तड़का लगाना हो, तेल के बिना काम ही नहीं चलता। लेकिन पिछले कुछ सालों में तेल के दाम जिस तरह बढ़े, उससे आम लोगों का बजट बिगड़ गया। ऐसे में अब खबरें आ रही हैं कि नए GST बदलाव के बाद खाने के तेल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। यही वजह है कि लोग जानना चाहते हैं कि आखिर बाजार में अभी असली रेट क्या चल रहा है और किसे इसका फायदा मिलेगा।

महंगाई के इस दौर में अगर रसोई का सबसे ज़रूरी सामान थोड़ा भी सस्ता होता है तो घर चलाने वालों को बड़ी राहत मिलती है। खासकर मिडिल क्लास और सीमित आय वाले परिवारों के लिए तेल की कीमत में बदलाव सीधे उनके मासिक खर्च पर असर डालता है। इसलिए यह अपडेट लोगों के लिए काफी अहम बन गया है।

GST बदलाव का असर कैसे पड़ता है दामों पर

भारत में किसी भी सामान की कीमत सिर्फ उसकी उत्पादन लागत से तय नहीं होती, उस पर टैक्स भी बड़ा रोल निभाता है। GST यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स की दरें जब बदलती हैं, तो कई बार रोजमर्रा की चीज़ों के दामों में भी फर्क देखने को मिलता है। खाने का तेल भी ऐसी ही चीज़ है जिस पर टैक्स स्ट्रक्चर का असर पड़ता है।

यह भी पढ़े:
Retirement Age Hike Update कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! रिटायरमेंट उम्र में हुआ बड़ा बदलाव Retirement Age Hike Update

जब GST कम किया जाता है या टैक्स ढांचे में बदलाव होता है, तो कंपनियों की लागत कुछ हद तक कम होती है। अगर यह फायदा सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया जाए, तो बाजार में कीमतों में गिरावट दिखाई दे सकती है। हालांकि कई बार ट्रांसपोर्ट, कच्चे माल और अंतरराष्ट्रीय बाजार के दाम भी तेल की कीमत को प्रभावित करते हैं, इसलिए सिर्फ GST ही एकमात्र कारण नहीं होता।

सरसों तेल के ताजा बाजार भाव

सरसों का तेल भारतीय रसोई में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले तेलों में से एक है। उत्तर भारत के कई राज्यों में तो यह रोजमर्रा का मुख्य कुकिंग ऑयल है। हाल के बाजार रुझानों की बात करें तो अलग-अलग ब्रांड के हिसाब से सरसों तेल के दाम अलग-अलग चल रहे हैं।

कई शहरों के रिटेल मार्केट में सरसों तेल लगभग 170 से 190 रुपये प्रति लीटर के बीच बिकता नजर आ रहा है। लोकल ब्रांड और बड़ी कंपनियों के पैक्ड ऑयल में थोड़ा अंतर हो सकता है। थोक मंडियों में रेट अलग हो सकते हैं, जबकि सुपरमार्केट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऑफर के कारण कीमत कुछ कम या ज्यादा भी हो सकती है। यानी ग्राहक को खरीदने से पहले आसपास के दाम जरूर देख लेने चाहिए।

यह भी पढ़े:
8th Pay Commission Salary Stast सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, 8वें वेतन में 3 गुना तक बढ़ोतरी 8th Pay Commission Salary

रिफाइंड तेल की कीमतों में क्या चल रहा है

रिफाइंड तेल जैसे सोयाबीन ऑयल, सनफ्लावर ऑयल और पाम ऑयल भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जाते हैं। ये तेल खासकर शहरों में ज्यादा लोकप्रिय हैं। रिफाइंड ऑयल की कीमत ब्रांड, पैक साइज और जगह के हिसाब से बदलती रहती है।

अभी कई जगहों पर रिफाइंड तेल की कीमत लगभग 105 रुपये से 145 रुपये प्रति लीटर के बीच बताई जा रही है। कुछ सस्ते ब्रांड इससे कम रेट पर भी मिल जाते हैं, जबकि प्रीमियम ब्रांड थोड़े महंगे हो सकते हैं। ऑफर पैक, फेस्टिव डिस्काउंट और थोक खरीद पर भी ग्राहकों को थोड़ा फायदा मिल सकता है।

पैकिंग में बदलाव से भी होता है भ्रम

हाल के समय में एक और चीज़ देखने को मिली है कि कई कंपनियों ने पैकिंग साइज में बदलाव कर दिया है। पहले जहां 1 लीटर का पैक मिलता था, अब कुछ ब्रांड 850 ml या 900 ml का पैक उसी जैसे दाम पर बेच रहे हैं। ऊपर से देखने पर लगता है कि दाम ज्यादा नहीं बढ़े, लेकिन मात्रा कम होने से असल में ग्राहक को कम तेल मिल रहा होता है।

यह भी पढ़े:
Heavy Rain Red Alert इन राज्यों में बारिश का रेड अलर्ट, मौसम विभाग की बड़ी चेतावनी IMD Rain Alert

इसलिए सिर्फ कीमत नहीं, पैक पर लिखी मात्रा भी जरूर देखनी चाहिए। कई बार ग्राहक जल्दी में या आदत से पुराना पैटर्न समझकर खरीद लेते हैं और बाद में पता चलता है कि पैक साइज छोटा था। यह बदलाव सीधा-सीधा किचन के मासिक बजट पर असर डाल सकता है।

किन लोगों को ज्यादा राहत मिल सकती है

तेल की कीमतों में थोड़ी भी गिरावट सबसे ज्यादा फायदा उन परिवारों को देती है जिनकी आय सीमित है। गांवों, छोटे शहरों और मिडिल क्लास परिवारों में रसोई का खर्च पहले ही काफी तंग बजट में चलता है। ऐसे में तेल, दाल और गैस जैसी चीज़ों के दाम कम होने से उन्हें कुछ राहत मिलती है।

छोटे होटल, ढाबे और स्ट्रीट फूड बेचने वाले लोगों के लिए भी तेल की कीमत बहुत मायने रखती है। उनका रोज का खर्च काफी हद तक तेल पर निर्भर होता है। अगर तेल सस्ता होता है तो उनकी लागत कम होती है, जिससे वे या तो थोड़ा मुनाफा बचा सकते हैं या ग्राहकों को सस्ती चीज़ें दे सकते हैं।

यह भी पढ़े:
PM Kisan Installment 22nd Official News किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! 22वीं किस्त खाते में आना शुरू PM Kisan 22th Kist Date

आगे क्या रह सकता है रुझान

खाने के तेल की कीमतें सिर्फ देश के अंदर के फैसलों पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी निर्भर करती हैं। भारत बड़ी मात्रा में खाने का तेल आयात करता है, खासकर पाम ऑयल और सनफ्लावर ऑयल। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ते हैं या सप्लाई में दिक्कत आती है, तो यहां भी कीमतें बढ़ सकती हैं।

इसलिए अभी जो राहत दिख रही है, वह हमेशा स्थायी रहे, यह जरूरी नहीं। ग्राहकों को समझदारी से खरीदारी करनी चाहिए और जरूरत से ज्यादा स्टॉक करने से बचना चाहिए। ऑफर के चक्कर में बहुत ज्यादा तेल खरीदना भी सही नहीं, क्योंकि हर तेल की एक तय शेल्फ लाइफ होती है।

समझदारी से खरीदारी ही असली बचत

आज के समय में सिर्फ कीमत कम होने का इंतजार करना काफी नहीं है। ग्राहकों को ब्रांड, मात्रा, गुणवत्ता और रेट सब कुछ देखकर खरीदना चाहिए। लोकल मार्केट, ऑनलाइन स्टोर और थोक दुकानों के रेट की तुलना करने से भी कुछ बचत हो सकती है।

यह भी पढ़े:
Outsource Employee Regularization आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत, कोर्ट ने नियमित करने का दिया आदेश Outsource Employee Regularization

घर के बजट को संतुलित रखने के लिए यह भी जरूरी है कि तेल का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाए। ज्यादा तला-भुना खाना सेहत के लिए भी ठीक नहीं और खर्च भी बढ़ाता है। कम तेल में पकाने की आदत से पैसे भी बचेंगे और सेहत भी बेहतर रहेगी।

Disclaimer:
यह लेख सामान्य बाजार रुझानों और उपलब्ध जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। खाने के तेल की कीमतें शहर, ब्रांड, टैक्स नीति और सप्लाई की स्थिति के अनुसार बदल सकती हैं। सटीक रेट जानने के लिए स्थानीय बाजार, आधिकारिक स्रोत या विक्रेता से जानकारी जरूर लें। यहां दी गई जानकारी को अंतिम मूल्य या सरकारी घोषणा न माना जाए।

यह भी पढ़े:
CTET 2026 CTET 2026 आंसर-की और रिजल्ट जारी, यहां देखें पूरी जानकारी CTET Exam 2026 Answer Key Result Update

Leave a Comment